ऑक्सीजन न मिलने से 100 से अधिक उद्योगों की सांसे अटकी 4 हजार क्यूबिक मीटर की मांग परंतु 5 दिन से नहीं हो रही आपूर्ति

 ऑक्सीजन न मिलने से 100 से अधिक उद्योगों की सांसे अटकी 

4 हजार क्यूबिक मीटर की मांग परंतु 5 दिन से नहीं हो रही  आपूर्ति   

औद्योगिक क्षेत्र के 100 से अधिक लघु उद्योगों में उत्पादन बंद, 8000 से अधिक मजदूरों के रोजगार पर संकट की लटकी तलवार ,

 मंडीदीप। कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन से अभी उद्योग उभर भी नहीं पाए थे कि अब उनके सामने ऑक्सीजन का एक और नया संकट खड़ा हो गया है । इसकी कमी ने क्षेत्र की छोटी बड़ी 100 से अधिक इकाइयों को वेंटिलेटर पर ला दिया है। इन उद्योगों में ऑक्सीजन की आपूर्ति न हो पाने के कारण जहां उनमें उत्पादन कार्य पूरी तरह से ठप हो गया है, वहीं इन कारखानों में काम करने वाले 8000  मजदूरों के रोजगार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। मैं प्रतिदिन रोजगार की आस लेकर फैक्ट्री तो जा रहे हैं परंतु उद्योग प्रबंधक गैस की कमी बताकर वापस लौटा देते हैं। यह स्थिति चले 5 दिनों से बनी हुई है।  औद्योगिक क्षेत्र में प्रतिदिन 4 हजार क्यूबिक मीटर ऑक्सीजन गैस की आवश्यकता होती है परंतु पिछले 5 दिनों से व ऑक्सीजन की सप्लाई पूरी तरह से बंद पड़ी हुई है। ऑक्सीजन सप्लाई ठप होने के कारण उद्योग वेंटिलेटर पर आ गए हैं। जिससे उन्हें प्रतिदिन बडी आर्थिक चपत तो लग ही रही है।समय पर ऑर्डर भी पूरा नहीं कर पा रहे हैं।दरअसल इसका कारण कोरोना के बढ़ते संक्रमित मरीज हैं। जिन्हें बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन की आवश्यकता है। इसे देखते हुए सरकार ने मरीजों को प्राथमिकता देते हुए ऑक्सीजन गैस सप्लायरओं को उद्योगों को गैस आपूर्ति बंद कर पहले अस्पतालों में गैस की आपूर्ति करने के आदेश दिए हैं।इसके चलते यहां  के प्लांटों से  उद्योगों में सप्लाई की जाने वाली ऑक्सीजन की आपूर्ति पूरी तरह से रोक दी गई है। इसका सीधा असर स्थानीय उद्योगों पर नजर आने लगा है।  बीते 1 सप्ताह से एचईजी, क्रॉन्पटन ,आईसर तथा बीटेक हाइड्रो सहित क्षेत्र की छोटी-बड़ी करीब 100 से अधिक इकाईयों में उत्पादन कार्य प्रभावित हो रहा है। 

फेब्रिकेशन कारखाने अधिक प्रभावित :

बता दें कि ये हालात इसलिए हैं क्योंकि मंडीदीप को गुजरात और महाराष्ट्र से मिलने वाली लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई रुक गई है, इस कारण शहर के 100 बड़े-छोटे उद्योगों को ऑक्सीजन देने वाला भार्गव कॉर्बाेनिक्स तथा एक अन्य प्लांट बंद हो गया है।

        इन दोनों प्लांटों से औद्योगिक क्षेत्र में 4000 क्यूबिक मीटरऑक्सीजन की सप्लाई प्रतिदिन की जाती है। परंतु इन दोनों  प्लांटों से  कारखानों को मिलने वाली ऑक्सीजन की सप्लाई बंद होने से सबसे अधिक प्रभाव फेब्रिकेशन वाली कंपनियों पर पड़ा है। औद्योगिक सूत्रों के अनुसार जिन कारखानों में कटिंग का काम होता है ,वहां काम पूरी तरह से बंद हो चुका है। इसके अलावा निर्माण क्षेत्र में इसका व्यापक असर हुआ है ।

         भार्गव कार्बोनेक्स के संचालक सौरभ भार्गव ने कहा कि पहले कोरोना संक्रमण की मार और अब ऑक्सीजन सप्लाई ना होने से कई उद्योगों में उत्पादन प्रभावित हो रहा है। इससे फेब्रिकेशन और फार्मा संबंधित उद्योगों को प्रतिदिन करोड़ों का नुकसान हो रहा है।उन्होंने सरकार से मेडिकल के साथ उद्योगो को भी कुछ कोटा निधारित करने की मांग की है। ताकि मजदूरों की रोजी रोटी चलती रहे।

  साल भर तक हाथ पर हाथ रखे बैठी रही सरकार नहीं किए कोई प्रयास:

एएआईएम के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल का कहना है कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण की भयावहता के कारण ऑक्सीजन गैस सिलेंडरों की कमी हो गई है। सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए ऑक्सीजन की अधिक आवश्यकता हैं। ऐसे में ऑक्सीजन गैस प्रोडक्ट करने वाले प्लांट केवल हॉस्पिटल में ही 100 फीसदी सिलेंडर सप्लाई कर रहे हैं लेकिन उद्योग विभाग और सरकार की ओर से ऑक्सीजन गैस सिलेंडर की सप्लाई बढ़ाने के कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। सरकार और सरकारी अमला साल भर तक हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहे बीते वर्ष भी ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा था परंतु जिम्मेदारों ने पहले आए संकट से कोई सबक नहीं सीखा। और ना ही गैस बढ़ाने के कोई सार्थक प्रयास किए। इसके परिणाम स्वरूप फिर से गैस सिलेंडर सप्लाई नहीं होने से उद्योगों में प्रोडक्शन ठप हो गया है। सरकार को मेडिकल के साथ ही इंडस्ट्री की डिमांड के अनुसार सप्लाई सुनिश्चित करनी चाहिए।

इनका कहना है

अभी हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता में लोगों की जान बचाना है इसलिए फिलहाल ऑक्सीजन गैस की सप्लाई अस्पतालों में करवा रहे हैं। अगले तीन-चार दिन में उद्योगों के लिए भी गैस की सप्लाई सुचारू रूप से होने लगेगी। इसके लिए हम व्यवस्था बना रहे हैं।

उमाशंकर भार्गव, कलेक्टर

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.