जैव विविधता वाटिका में 40 प्रजातियों के जंगली पौधे लगाए

जैव विविधता वाटिका में 40 प्रजातियों के जंगली पौधे लगाए

एक दिन में ही लग गए 40 किस्म के पौधे 

         सतना-  वन मण्डलाधिकारी सतना  राजेश कुमार राय एवं प्रशिच्छु ifs  अनुपम शर्मा व इंजीनियर ताम्रकार के विशिष्ठ आतित्थ में आज ग्राम पंचायत पिथौरावाद परिसर की जैव विविधता वाटिका में लगभग 40 प्रजातियों के जंगली पौधे लगाए गए। 

        इन पौधों में अन्य पौधों के साथ साथ दहिमन, कसही, मैदा, बीजा, सांदन, कोसम ,हर्र, बहेरा आदि प्रमुख हैं।

          आज के इस बृक्षा रोपड़ कार्यक्रम में  मुख्य अतिथि श्री राय ,विशिष्ट अतिथि के साथ साथ सरपंच आशोक नागर एकता परिषद के वरिष्ठ कार्यकर्ता सन्तोष सिंह ,पंचायत सचिव छकौड़ी लाल सिंह सहित जैव विविधता प्रवंधन समिति के सदस्य एवं गाँव के अनेक नागरिकों ने बृक्षारोपण किया।

            बृक्षा रोपड़ के पश्चात मुख्य अतिथि  ने अपने उदबोधन में कहा कि "पेड़ लगाना सरल है किन्तु कठिन है उसकी सुरक्षा।  पर इस वाटिका में सिचाई के साधन से लेकर सुरक्षा के लिए जाली लगी हुई है। साथ ही तालाब की उपजाऊ मिट्टी भी पाटी गई है । इसलिए यह पौधे दो वर्ष में ही बड़े हो जाएंगे।

         जैव विविधता वाटिका समारोह के संयोजक इन्द्रपाल सिंह ने कहा कि अभी तो आज 40 प्रजातियां ही लगी हैं पर निकट भविष्य में हम और भी अनेक प्रजातियों के पौधे  खोज खोज कर इसमें लगवाए गे।  क्यो कि इस वाटिका के मैदान में लगभग डेढ़ सौ बृक्ष लगाने की क्षमता है। और हमे मात्र बाग नही बल्कि प्रजातियों का बाग लगाना है। 

        सर्जना के अनुपम दाहिया ने सुझाव देते हुए  कहा  कि पेड़ो के बीच जहाँ अन्य जड़ी बूटियां लगाना उचित रहे गा वही जाली के पास किनारे किनारे वेल वाले कन्द लगाना अच्छा रहे गा।हमारे पास खनुआ, पीडी, बैचादी, बराही कन्द तथा घुंची की लाल सफेद, एवं काली किस्मे हैं जिन्हें हम उपलब्ध करा देंगे।

      एकता परिषद के सन्तोष सिंह ने भी अपने पेड़ लगाने के अनुभव साझा किए। इस बीच  समाज सेवी स्व. महिपाल सिंह की याद आये बिना नही रही जो हमेशा ऐसे कामो में आगे रहते थे।

एक दिन में लगाए गए पौधे 

1-- सागौन 2- आंवला 3- मुनगा 4 , अचार 5, कहुआ 6, कपाक, 7 काला सिरस 8, सिसु 9, शहतूत, 10, नील गिरी 11,अंजन 12, तमोली 13, खमेर 14- अमलतास 15, सीताफल 16, रीठा 17- बहेड़ा 18, बेल 19, इमली20, कचनार 21, कदम 22, कैथा 23, जामुन 24, खिन्नी 25, मौलश्री 26, आम27, अनार28, लसोड़ा 29, पीपल 30, बरगद 31, पुत्रजीवा 32, चिल्ला 33, लभेर 34- दहिमन 35, कैमा 36, नीम 37- सांदन38, कोसम 39, सफेद पलास 40, खूझा 41, ऊमर

हर पौधा एक दूसरे से भिन्न 

 हर  पौधा हमारे वाटिका की भूमि से एक जैसा ही पोषक तत्व और जल ग्रहण करेगा किन्तु सब मे एक दूसरे से भिन्न भिन्न आकार प्रकार एवं स्वाद  के फल लगे गे तथा अलग अलग समय मे पके गे जिससे कोई जीव जन्तु भूखों न मरे। 

     कुछ हमारे खाने लायक तो कुछ अन्य जन्तुओ के खाने लायक होंगे । 

   इनमे कुछ औषधीय उपयोग के भी होंगे। इनके नियंत्रण के लिए भी अलग अलग तरह की कीट ब्याधिया होगी जिससे बहुत बड़ी जैव विविधता संरक्षित होती है।

       यहां तक की इनके फल फूल पत्ते जमीन में गिरते है उंन्हे भी खाने के लिए कोई न कोई कीट वहां पैदा होता है। और यही सब मिलकर जैव विविधता कहलाती है।

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