किसानों के दांव पर 7 करोड़ 73 लाख 25 हजार रुपए 3 सप्ताह से मानसून रूठा दो-चार दिन न बरसा तो इतने ही और खर्चने पड़ेंगे

 किसानों के दांव पर 7 करोड़ 73 लाख 25 हजार  रुपए 

 3 सप्ताह से मानसून रूठा  दो-चार दिन न बरसा तो इतने ही और खर्चने पड़ेंगे

ब्लॉक के किसानों ने अच्छे मानसून  की उम्मीद में करीब 7 करोड़73 लाख 25 हजार रुपए खेतों में निवेश किए 

 मंडीदीप।  औबेदुल्लागंज ब्लॉक में इस बार एक सप्ताह पहले आए मानसून से उत्साहित किसानों ने कुल लक्ष्य 53000 हेक्टेयर के मुकाबले करीब 11,000 हेक्टेयर में धान मक्का अरहर और सोयाबीन जैसी फसलों की बुआई तो कर दी है, लेकिन अब मानसून तरसाने लगा है। अधिकांश हिस्सों में तेज धूप पड़ रही है और बारिश गायब है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि कई नव अंकुरित फसलों को एक सप्ताह के भीतर पानी मिला तो ठीक नहीं तो फसल सूख जाएंगी।फसल सूखने का मतलब किसानों के 7 करोड़ 73 लाख 25 हजार रुपए डूबने के साथ ही नई फसल बोने के लिए इतना ही खर्च दोबारा  करना पड़ जाएगा। बता दें कि प्रदेश में जून की शुरुआत में प्री मानसून की अच्छी झमाझम बारिश ने उम्मीद जगाई थी कि पूरा सीजन भी अच्छा निकलेगा। इसी को ध्यान में रखते हुए  किसानों की खरीफ की बुआई शुरू कर दी। इसके बाद 15 जून को मानसून की दस्तक की पुष्टि होने से भी तसल्ली हो गई, लेकिन 21 दिन से बारिश थमी हुई और तेज धूप से खेतों की नमी सूखती जा रही है।

        बता दें कि ब्लॉक में अब तक धान 8000 हेक्टेयर, मक्का 2500 हेक्टेयर , सोयाबीन 200 एवं तूअर  की 70 हेक्टेयर में बोवनी की गई है। इनमें सबसे अधिक खर्चा धान में आया। दाहोद के किसान शंकर नगर बताते हैं कि धान का खेत तैयार करने से लेकर रूपाई तक प्रति एकड़ में  3000 का खर्चा आया। इसी तरह मक्का ,सोयाबीन और तूअर में ढाई हजार रुपए प्रति एकड़ व्यय हुआ। इस तरह सबसे अधिक धान और सबसे कम अरहर में निवेश किया ।ब्लॉक के किसान इन फसलों की बोवनी  पर  7 करोड़ 73 लाख 25 हजार का निवेश कर चुके हैं । इन फसलों को 1 सप्ताह के अंदर पानी नहीं मिला तो बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा । जबकि तेज गर्मी कम नहीं हुई तो एक-दो दिन के बाद धान के रोपे को नुकसान हो सकता है।किसानाें के करीब 7  कराेड़ 73 लाख 25 हजार रुपए दांव पर लगे हैं। गर्मी एसी ही तेज रही और 2 -3 दिन तक बारिश नहीं हुई तो बीज आकार ही नहीं ले पाएगा। ऐसे में कृषकों को नुकसान हो सकता है।अभी तक कुल 296 मिमी बारिश हुई है। इस संबंध में कृषि विभाग के वरिष्ठ खंड विकास अधिकारी डी एस भदौरिया का कहना है कि किसानों को धान का रोपा डाले हुए 1 महीने से अधिक का समय बीत चुका है और अब यदि जल्दी ही बरसात नहीं होती है तो धान का रोपा सहित अन्य फसलों का बीज बर्बाद हो सकता है। ऐसे में किसानों को इतना ही पैसा दोबारा से खर्च करना पड़ेगा।

         पिपलिया के किसान कमल पटेल व नेमीचंद लोवंशी ने बताया कि यदि 1 सप्ताह में बारिश नहीं हुई तो बहुत नुकसान होगा। जिनके पास पानी की व्यवस्था है वह मोटर से गड्ढों में पानी भरकर धान की बोनी शुरू कर देंगे। लेकिन जिन किसानों के पास पर्याप्त पानी की व्यवस्था नहीं है या संसाधन नहीं है उन्हें नुकसान होगा।

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