खेत मे लगे कीटों से परेशान मत होइए वह तो मकड़ी के बच्चों केलिए प्रकृति का भेजा उपहार हैं

 खेत मे लगे कीटों से परेशान मत होइए

वह तो मकड़ी के बच्चों केलिए प्रकृति का भेजा उपहार हैं


           ०--बाबूलाल दाहिया

                 मित्रो! जैसे ही सितम्बर की 20 तारीख आती है मकड़ी खेतो की फसल य घर का कोना हर जगह अपना जाल फैलाने लगती हैं। उसका जाल बुनना जहा वर्षा ऋतु के समाप्ति का संकेतक है वही उनके प्रजनन काल का मौसम भी।

           फिर  इसी जाल में एक -एक मकड़ी सैकड़ो के तादाद में अंडे देगी और बच्चे निकले गे। पर क्या मकड़ी के बच्चे अनाज के पत्ते खाएंगे?

          नही क्योकि मकड़ी शाकाहारी नही मांसाहारी कीट है ? और वह अपना वंश परिवर्धन करके वही काम करना चाह रही है जो दायित्व उसे प्रकृति ने सौपा है।यानी मच्छर मक्खियों का खात्मा।

         क्योकि वर्षात में अनुकूल वातावरण प्राप्त मक्खी मच्छर अपनी संख्या बढ़ा कर अन्य जन्तुओ के लिए  सिर दर्द बन जाते हैं।

         पर सितम्बर का अंतिम सप्ताह मकडियों के लिए अनुकूल होता है जब एक- एक मकड़ी के जाल में सैकड़ो के तादाद में पैदा हुए उसके छोटे छोटे बच्चे बड़े होने तक क्या खाय गे ?

        बस उन्ही के लिए यह आप की फसल में लगने वाले कीट प्रकृति के भेजे हुए उपहार हैं। किन्तु परेशान आप हैं।

         यह अकेले रूप सिंह रोहना के खेत भर के मकड़ी के जाल नही है? यदि आप के क्षेत्र में वर्षा ऋतु समाप्त होगई होगी तो वहां भी दिख जाए गे।

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